Wednesday, 22 February 2012

दोस्ती का गुलदस्ता (अनुवाद)


अद्भुत एवं अनूठे पौधों से चुने
सुंदर फूलों के गुलदस्ते से
अपने दोस्तों के यादों से बने
गुलदस्ते को देखकर लगा मुझे
इतना सुंदर कोई गुलदस्ता हो सकता है कहीं
मेरे जीवन काल का अमूल्य समय
इनको चुनने में शायद बीत चुका हो
पर अब भी मेरा यह कार्य चालू है
मैं दोस्ती के फूल तोडता जाऊँगा
अपने इस गुलदस्ते में जोडता जाऊँगा
जीवन के अंतिम पग तक
पर मेरे दोस्त
इस पूरे गुलदस्ते में तुम्हारा सुमन विशेष रहेगा
साथ बीते हर खुशी हर गम को महकाता रहेगा
तुम्हारे साथ मेरे जीवन पथ को भी चमकाता रहेगा ।।

No comments:

Post a Comment